Indian Polity: ➢ Government of India Act 1935, Constituent Assembly and Salient features of the Constitution of India - 2026
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कुल प्रश्न: 75 | कुल अंक: 75 | सही पर: +1 | गलत पर: -1/3
प्र. 1: भारत शासन अधिनियम 1935 के तहत प्रस्तावित 'अखिल भारतीय संघ' (All India Federation) के अस्तित्व में न आ पाने का सर्वप्रमुख वैधानिक व ऐतिहासिक कारण निम्नलिखित में से क्या था?
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: भारत शासन अधिनियम 1935 में एक अखिल भारतीय संघ की स्थापना का प्रावधान था, जिसमें ब्रिटिश भारतीय प्रांत और देशी रियासतें दोनों शामिल होनी थीं। अधिनियम के अनुसार यह संघ तभी अस्तित्व में आ सकता था जब रियासतों के कम से कम 52 सदस्य (कुल 104 में से) उच्च सदन (काउंसिल ऑफ स्टेट) में शामिल होने के लिए सहमत हों। चूँकि आवश्यक संख्या में देशी रियासतों ने अपनी स्वायत्तता खोने के डर से 'इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन' पर हस्ताक्षर नहीं किए, इसलिए यह संघीय योजना कभी धरातल पर नहीं उतर सकी।
प्र. 2: संविधान सभा के स्वरूप और उसकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: I. संविधान सभा का चुनाव ब्रिटिश भारत के प्रांतों की विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के आधार पर एकल संक्रमणीय मत द्वारा किया गया था। II. संविधान सभा पूरी तरह से एक संप्रभु निकाय के रूप में गठित हुई थी, जिस पर ब्रिटिश संसद का कोई नियंत्रण नहीं था। III. महात्मा गांधी और एम.ए. जिन्ना दोनों ही अंततः संविधान सभा के सदस्य नहीं बने।
नीचे दिए गए कूट का उपयोग कर सही उत्तर चुनिए:
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: कथन I सही है क्योंकि सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा किया गया था। कथन III सही है क्योंकि गांधीजी और जिन्ना दोनों ही इस सभा का हिस्सा नहीं थे। कथन II गलत है क्योंकि 1946 में जब कैबिनेट मिशन योजना के तहत संविधान सभा का गठन हुआ, तब यह पूर्णतः संप्रभु निकाय नहीं थी। इसे भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 के पारित होने के पश्चात 15 अगस्त 1947 को पूर्ण संप्रभुता प्राप्त हुई।
प्र. 3: भारतीय संविधान की आधारभूत विशेषताओं (Salient Features) और उसके संशोधनों के संदर्भ में वर्ष 2026 तक के अद्यतन वैधानिक प्रावधानों के आलोक में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: विकल्प D असत्य है। राज्य के नीति निदेशक तत्वों (भाग IV) और मौलिक अधिकारों (भाग III) में संशोधन के लिए केवल संसद के विशेष बहुमत (सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत और उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई) की आवश्यकता होती है। आधे राज्यों के विधानमंडलों के अनुसमर्थन की आवश्यकता केवल संघीय ढांचे से संबंधित प्रावधानों (जैसे- राष्ट्रपति का चुनाव, सर्वोच्च न्यायालय, सातवीं अनुसूची की सूचियां) के संशोधन के लिए होती है (अनुच्छेद 368)।
प्र. 4: संविधान सभा की प्रमुख समितियों और उनके अध्यक्षों के संदर्भ में सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए:
सूची-I (समिति) A. प्रांतीय संविधान समिति B. संघ शक्ति समिति C. प्रारूप समिति D. प्रक्रिया नियम समिति
सूची-II (अध्यक्ष) 1. डॉ. बी.आर. अंबेडकर 2. डॉ. राजेंद्र प्रसाद 3. सरदार वल्लभभाई पटेल 4. जवाहरलाल नेहरू
नीचे दिए गए कूट में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: सरदार वल्लभभाई पटेल प्रांतीय संविधान समिति के अध्यक्ष थे। जवाहरलाल नेहरू ने संघ शक्ति समिति और संघीय संविधान समिति की अध्यक्षता की। डॉ. बी.आर. अंबेडकर प्रारूप समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष थे। डॉ. राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के अध्यक्ष होने के साथ-साथ प्रक्रिया नियम समिति और संचालन समिति (Steering Committee) के भी अध्यक्ष थे।
प्र. 5: भारतीय संविधान के निर्माण और उससे जुड़ी ऐतिहासिक घटनाओं को उनके सही कालक्रमानुसार (सबसे पहले से नवीनतम की ओर) व्यवस्थित कीजिए: 1. क्रिप्स मिशन का भारत आगमन 2. उद्देश्य प्रस्ताव (Objective Resolution) का संविधान सभा में प्रस्तुत किया जाना 3. अगस्त प्रस्ताव (August Offer) की घोषणा 4. संविधान सभा द्वारा राष्ट्रीय ध्वज को अपनाया जाना
सही कूट का चयन करें:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: घटनाओं का सही कालक्रम इस प्रकार है: 1. अगस्त प्रस्ताव - 8 अगस्त 1940 (वायसराय लिनलिथगो द्वारा)। 2. क्रिप्स मिशन - मार्च 1942 (सर स्टैफोर्ड क्रिप्स के नेतृत्व में)। 3. उद्देश्य प्रस्ताव - 13 दिसंबर 1946 (जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रस्तुत)। 4. राष्ट्रीय ध्वज को अपनाना - 22 जुलाई 1947। अतः सही क्रम 3, 1, 2, 4 है।
प्र. 6: नीचे दो वक्तव्य दिए गए हैं: एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है। अभिकथन (A): के.सी. व्हीयर (K.C. Wheare) ने भारतीय संविधान को 'अर्ध-संघात्मक' (Quasi-Federal) करार दिया है। कारण (R): भारतीय संविधान सामान्य परिस्थितियों में संघात्मक रूप में कार्य करता है, परंतु आपातकाल के दौरान यह पूर्ण रूप से एकात्मक हो जाता है, जिसके लिए किसी संविधान संशोधन की आवश्यकता नहीं होती।
दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: अभिकथन (A) सत्य है क्योंकि के.सी. व्हीयर ने भारतीय संविधान के मजबूत एकात्मक झुकाव को देखते हुए इसे 'अर्ध-संघात्मक' कहा था। कारण (R) भी सत्य है, क्योंकि अनुच्छेद 352 आदि के तहत आपातकाल लागू होने पर राज्य सरकारें केंद्र के पूर्ण नियंत्रण में आ जाती हैं और ढांचा एकात्मक हो जाता है। हालांकि, (R) के.सी. व्हीयर के 'अर्ध-संघात्मक' कहने का एकमात्र या मुख्य आधार (व्याख्या) नहीं है; व्हीयर का तर्क शक्तियों के विभाजन में केंद्र की सामान्य स्थिति में भी मजबूत पकड़ (जैसे राज्यपालों की नियुक्ति, अनुच्छेद 249, समवर्ती सूची में केंद्र की प्रधानता) पर आधारित था। अतः दोनों सही हैं, पर व्याख्या आंशिक रूप से ही मेल खाती है।
प्र. 7: भारतीय संविधान के 'विदेशी स्रोतों' (Salient Features - Borrowed Features) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सुमेलित नहीं है?
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: विकल्प C सुमेलित नहीं है। भारतीय संविधान में अवशिष्ट शक्तियों (Residuary Powers) का केंद्र में निहित होना और एक मजबूत केंद्र के साथ संघीय व्यवस्था का प्रावधान कनाडा के संविधान (Canadian Constitution) से प्रेरित है, न कि ब्रिटिश संविधान से। ब्रिटिश संविधान से मुख्य रूप से संसदीय प्रणाली, एकल नागरिकता, और विधायी प्रक्रिया ली गई है।
प्र. 8: "यह ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में स्थापित होने वाला अंतिम सबसे व्यापक और जटिल दस्तावेज़ था। इसमें 321 धाराएँ और 10 अनुसूचियाँ थीं। वर्तमान भारतीय संविधान के लगभग 250 से अधिक अनुच्छेद प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इसी के प्रावधानों से ग्रहण किए गए हैं, जो भारत में एक उत्तरदायी सरकार की दिशा में एक प्रमुख मील का पत्थर साबित हुआ।" उपर्युक्त परिच्छेद निम्नलिखित में से किस ऐतिहासिक अधिनियम या रिपोर्ट की ओर इंगित करता है?
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: उपर्युक्त विवरण भारत शासन अधिनियम, 1935 से संबंधित है। यह ब्रिटिश संसद द्वारा पारित तब तक का सबसे लंबा अधिनियम था, जिसे बाद में दो भागों (भारत और बर्मा अधिनियम) में विभाजित किया गया था। भारतीय संविधान का ढांचागत हिस्सा (Structural part) काफी हद तक इसी अधिनियम से लिया गया है, जिसमें न्यायपालिका, लोक सेवा आयोग, आपातकालीन प्रावधान और प्रशासनिक विवरण शामिल हैं।
प्र. 9: संविधान सभा में देशी रियासतों और ब्रिटिश प्रांतों के प्रतिनिधित्व के संदर्भ में, उन प्रांतों/रियासतों के सही समूह का चयन करें जिन्होंने संविधान सभा में क्रमशः सबसे अधिक प्रतिनिधि भेजे थे (विभाजन से पूर्व की स्थिति के अनुसार)?
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: संविधान सभा में ब्रिटिश भारतीय प्रांतों में सर्वाधिक प्रतिनिधित्व संयुक्त प्रांत (United Provinces - वर्तमान उत्तर प्रदेश) का था, जहाँ से 55 सदस्य चुने गए थे। देशी रियासतों की बात करें तो मैसूर रियासत ने सर्वाधिक 7 प्रतिनिधि भेजे थे (जबकि हैदराबाद रियासत ने संविधान सभा का पूर्ण बहिष्कार किया था और अपना कोई प्रतिनिधि नहीं भेजा था)।
प्र. 10: भारत शासन अधिनियम 1935 द्वारा स्थापित 'संघीय न्यायालय' (Federal Court) के संबंध में निम्नलिखित कथनों का विश्लेषण कीजिए: I. इसकी स्थापना 1937 में नई दिल्ली में की गई थी, जिसका मुख्य कार्य केंद्र और प्रांतों के बीच विवादों का निपटारा करना था। II. यह भारत के लिए अंतिम अपीलीय न्यायालय (Highest Court of Appeal) था, जिसके निर्णयों को कहीं और चुनौती नहीं दी जा सकती थी। III. इसके प्रथम मुख्य न्यायाधीश सर मौरिस ग्वेयर (Sir Maurice Gwyer) थे।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: कथन I और III सत्य हैं। 1935 के अधिनियम के तहत 1937 में संघीय न्यायालय स्थापित हुआ और सर मौरिस ग्वेयर इसके पहले मुख्य न्यायाधीश बने। कथन II असत्य है क्योंकि संघीय न्यायालय भारत के लिए अंतिम अपीलीय न्यायालय नहीं था; इसके निर्णयों के विरुद्ध लंदन स्थित 'प्रिवी काउंसिल' (Privy Council) में अपील की जा सकती थी। अंतिम अपीलीय न्यायालय के रूप में वर्तमान सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना 28 जनवरी 1950 को हुई थी।
प्र. 11: भारतीय संविधान की 'प्रस्तावना' (Preamble) और इसकी वैधानिक स्थिति के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: विकल्प C असत्य है। केशवानंद भारती मामले (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावना संविधान का हिस्सा है और अनुच्छेद 368 के तहत इसमें संशोधन किया जा सकता है, बशर्ते संशोधन संविधान के 'मूल ढांचे' (Basic Structure) को नष्ट न करे। इसी आधार पर 1976 में 42वें संशोधन द्वारा इसमें संशोधन किया भी गया था। प्रस्तावना को समग्र रूप से असंशोधनीय नहीं माना गया है।
प्र. 12: वर्ष 2026 के परिदृश्य में, यदि भारत सरकार किसी विदेशी क्षेत्र का अधिग्रहण कर उसे भारत संघ में एक नए राज्य के रूप में शामिल करना चाहती है, तो भारतीय संविधान की आधारभूत विशेषताओं के अंतर्गत संसद को मुख्य रूप से किस/किन अनुच्छेद(धों) का प्रयोग करना होगा?
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 2 संसद को विधि द्वारा ऐसे निबंधनों और शर्तों पर, जो वह ठीक समझे, संघ में नए राज्यों के प्रवेश या उनकी स्थापना की शक्ति देता है। विदेशी क्षेत्र का भारत में नए राज्य के रूप में प्रवेश अनुच्छेद 2 के तहत होता है, जबकि वर्तमान राज्यों की सीमाओं/नामों में परिवर्तन अनुच्छेद 3 के तहत होता है। अनुच्छेद 4 स्पष्ट करता है कि अनुच्छेद 2 और 3 के तहत बनाए गए कानून अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन नहीं माने जाएंगे, अतः यह कार्य साधारण बहुमत से किया जा सकता है।
प्र. 13: भारत शासन अधिनियम 1935 के तहत शक्तियों के विभाजन की सूचियों और उनमें शामिल विषयों की संख्या के संबंध में सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए:
सूची-I (सूचियां - 1935 अधिनियम) A. संघीय सूची (Federal List) B. प्रांतीय सूची (Provincial List) C. समवर्ती सूची (Concurrent List)
सूची-II (विषयों की संख्या) 1. 36 विषय 2. 54 विषय 3. 59 विषय
नीचे दिए गए कूट का उपयोग कर सही उत्तर चुनें:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: भारत शासन अधिनियम 1935 ने केंद्र और प्रांतों के बीच शक्तियों का विभाजन तीन सूचियों के माध्यम से किया था: संघीय सूची में 59 विषय, प्रांतीय सूची में 54 विषय और समवर्ती सूची में 36 विषय शामिल थे। अवशिष्ट शक्तियाँ (Residuary Powers) वायसराय (गवर्नर-जनरल) को प्रदान की गई थीं।
प्र. 14: नीचे दिए गए अभिकथन (A) और कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़ें: अभिकथन (A): भारतीय संविधान एक 'एकीकृत स्वतंत्र न्यायपालिका' (Integrated Independent Judiciary) की स्थापना करता है, जो अमेरिका की दोहरी न्यायपालिका व्यवस्था से भिन्न है। कारण (R): भारत में राज्य स्तर पर उच्च न्यायालयों को केवल राज्य के कानूनों को लागू करने का अधिकार है, जबकि सर्वोच्च न्यायालय केवल केंद्रीय कानूनों से संबंधित मामलों की सुनवाई करता है।
सही विकल्प का चुनाव कीजिए:
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: अभिकथन (A) सत्य है क्योंकि भारत में न्यायपालिका की एकल पदानुक्रमित संरचना (सबसे ऊपर सुप्रीम कोर्ट, फिर हाई कोर्ट और अधीनस्थ न्यायालय) है, जो अमेरिकी मॉडल (जहां संघीय और राज्य न्यायालय अलग-अलग होते हैं) से अलग है। कारण (R) पूर्णतः गलत है क्योंकि भारत में एकीकृत न्यायपालिका के तहत सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय दोनों ही केंद्रीय और राज्य दोनों कानूनों को लागू करते हैं और उनकी वैधानिकता की जांच कर सकते हैं।
प्र. 15: संविधान सभा द्वारा संविधान के प्रारूप पर तीन वाचन (Readings) किए गए थे। निम्नलिखित में से किस अवधि के दौरान संविधान का सबसे महत्वपूर्ण और विस्तृत 'दूसरा वाचन' (Second Reading - खंडशः विचार) संपन्न हुआ था, जिसमें हज़ारों संशोधनों पर चर्चा की गई?
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: संविधान के प्रारूप पर दूसरा वाचन (खंडवार विचार) सबसे लंबा और गहन था, जो 15 नवंबर 1948 को शुरू हुआ और 17 अक्टूबर 1949 तक चला। इस दौरान कुल 7653 संशोधन प्रस्तुत किए गए, जिनमें से 2473 पर सभा में विस्तार से चर्चा हुई। पहला वाचन (सामान्य चर्चा) 4 से 9 नवंबर 1948 तक चला और तीसरा वाचन 14 नवंबर से 26 नवंबर 1949 तक हुआ, जब संविधान को अंतिम रूप से पारित किया गया।
प्र. 16: भारत शासन अधिनियम, 1935 के तहत 'प्रांतीय स्वायत्तता' (Provincial Autonomy) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: I. इस अधिनियम ने प्रांतों में 1919 के अधिनियम द्वारा लागू 'द्वैध शासन' (Dyarchy) को समाप्त कर दिया और उसके स्थान पर प्रांतीय स्वायत्तता की शुरुआत की। II. प्रांतीय प्रशासन पूरी तरह से निर्वाचित विधानमंडलों के प्रति उत्तरदायी मंत्रियों को सौंप दिया गया था, और गवर्नरों के पास कोई विशेषाधिकार नहीं बचा था। III. अधिनियम की धारा 93 के तहत प्रांतीय गवर्नर को यह अधिकार था कि संवैधानिक तंत्र विफल होने की स्थिति में वह प्रांतीय सरकार के सभी अधिकार अपने हाथों में ले सकता था।
नीचे दिए गए कूट का उपयोग कर सही उत्तर का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: कथन I और III सही हैं। 1935 के अधिनियम ने प्रांतों में द्वैध शासन को समाप्त कर प्रांतीय स्वायत्तता लागू की और धारा 93 के तहत गवर्नर को संकटकालीन शक्तियां प्रदान कीं। कथन II असत्य है क्योंकि प्रांतीय स्वायत्तता के बावजूद गवर्नर को अल्पसंख्यकों, लोक सेवकों के अधिकारों की रक्षा और कानून-व्यवस्था के संबंध में 'विवेकाधीन शक्तियां' (Discretionary Powers) और 'व्यक्तिगत निर्णय' (Individual Judgement) की विशेष शक्तियां प्राप्त थीं, जो निर्वाचित मंत्रियों के अधिकारों को सीमित करती थीं।
प्र. 17: भारतीय संविधान सभा (Constituent Assembly) की संरचना और कार्यप्रणाली के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: विकल्प C असत्य है। कैबिनेट मिशन योजना के अनुसार, देशी रियासतों को आवंटित 93 सीटों के लिए प्रतिनिधियों का चुनाव नहीं होना था, बल्कि उनका मनोनयन (Nomination) रियासतों के प्रमुखों (राजाओं/नवाबों) द्वारा किया जाना था। रियासतों में कोई लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया नहीं अपनाई गई थी।
प्र. 18: संविधान सभा से जुड़े महत्वपूर्ण व्यक्तियों और उनके द्वारा निभाई गई भूमिकाओं के संदर्भ में सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए:
सूची-I (व्यक्तित्व) A. बी. एन. राव (B. N. Rau) B. एच. सी. मुखर्जी (H. C. Mukherjee) C. एस. एन. मुखर्जी (S. N. Mukherjee) D. प्रेम बिहारी नारायण रायजादा (P. B. Narain Raizada)
सूची-II (भूमिका) 1. संविधान सभा के मुख्य प्रारूपकार (Chief Draftsman) 2. मूल संविधान के प्रमुख सुलेखक (Calligrapher) 3. संविधान सभा के उपाध्यक्ष (Vice-President) 4. संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार (Constitutional Advisor)
नीचे दिए गए कूट का उपयोग कर सही उत्तर का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: सर बी. एन. राव को संविधान सभा का संवैधानिक सलाहकार नियुक्त किया गया था। एच. सी. मुखर्जी (और वी. टी. कृष्णामाचारी) संविधान सभा के उपाध्यक्ष थे। एस. एन. मुखर्जी संविधान सभा में संविधान के मुख्य प्रारूपकार (Chief Draftsman) थे, जिन्होंने जटिल कानूनी प्रस्तावों को स्पष्ट भाषा में ढाला। प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने मूल संविधान को इटैलिक शैली में अपने हाथों से लिखा (Calligraphy) था।
प्र. 19: नीचे दो वक्तव्य दिए गए हैं: एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है। अभिकथन (A): भारतीय संविधान न तो ब्रिटेन के संविधान की तरह पूरी तरह लचीला (Flexible) है और न ही अमेरिका के संविधान की तरह अत्यंत कठोर (Rigid), बल्कि यह दोनों का एक अनूठा समन्वय है। कारण (R): भारतीय संसद को अनुच्छेद 368 के तहत संविधान के किसी भी हिस्से (मूल अधिकारों सहित) में साधारण बहुमत से संशोधन करने की असीमित शक्ति प्राप्त है।
दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: अभिकथन (A) सत्य है क्योंकि भारतीय संविधान में कुछ प्रावधान साधारण बहुमत से, कुछ विशेष बहुमत से और कुछ विशेष बहुमत के साथ राज्यों के अनुसमर्थन से संशोधित किए जाते हैं, जो लचीलेपन और कठोरता का मिश्रण है। कारण (R) पूर्णतः गलत है क्योंकि संसद को असीमित संशोधन शक्ति प्राप्त नहीं है (केशवानंद भारती केस के तहत 'मूल ढांचे' का सिद्धांत लागू है) और अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन 'विशेष बहुमत' से होते हैं, 'साधारण बहुमत' से नहीं।
प्र. 20: भारतीय संविधान की एक प्रमुख विशेषता 'संसदीय शासन प्रणाली' है, जिसे वेस्टमिंस्टर मॉडल पर आधारित माना जाता है। 2026 के अद्यतन संवैधानिक ढांचे और न्यायशास्त्र के अनुसार, भारतीय संसदीय प्रणाली ब्रिटिश संसदीय प्रणाली से किस मूलभूत सैद्धांतिक आधार पर भिन्न है?
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: ब्रिटेन में 'संसदीय संप्रभुता' का सिद्धांत है, जिसका अर्थ है कि वहां की संसद कोई भी कानून बना या बदल सकती है और वहां कोई लिखित संविधान नहीं है जो संसद की शक्ति को सीमित करे। इसके विपरीत, भारत में संविधान सर्वोच्च है। भारतीय संसद की विधायी शक्तियां संविधान द्वारा सीमित हैं और सर्वोच्च न्यायालय को 'न्यायिक समीक्षा' (Judicial Review) के माध्यम से असंवैधानिक कानूनों को रद्द करने की शक्ति प्राप्त है। इसके अतिरिक्त, भारत में प्रधानमंत्री संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) का सदस्य हो सकता है, जबकि ब्रिटेन में उसे 'हाउस ऑफ कॉमन्स' का सदस्य होना अनिवार्य है।
प्र. 21: संविधान निर्माण प्रक्रिया से जुड़ी निम्नलिखित ऐतिहासिक घटनाओं को उनके घटित होने के सही कालक्रम (सबसे पहले से सबसे बाद में) के अनुसार व्यवस्थित कीजिए: 1. बी. एन. राव द्वारा संविधान का पहला कच्चा प्रारूप (Initial Draft) तैयार किया जाना। 2. संविधान सभा द्वारा 'प्रारूप समिति' (Drafting Committee) का गठन किया जाना। 3. डॉ. बी. आर. अंबेडकर द्वारा संविधान सभा में संविधान का अंतिम प्रारूप पेश किया जाना (पहला वाचन)। 4. प्रारूप समिति द्वारा भारत के संविधान का 'पहला प्रकाशित प्रारूप' (Published Draft) प्रस्तुत किया जाना।
सही कूट का चयन करें:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: घटनाओं का सही कालक्रम इस प्रकार है: 1. प्रारूप समिति का गठन - 29 अगस्त 1947। 2. संवैधानिक सलाहकार बी.एन. राव द्वारा पहला कच्चा प्रारूप तैयार करना - अक्टूबर 1947 (इसी पर प्रारूप समिति ने विचार किया)। 3. प्रारूप समिति द्वारा पहला प्रकाशित प्रारूप प्रस्तुत करना - फरवरी 1948 (जिस पर जनता से सुझाव मांगे गए)। 4. डॉ. अंबेडकर द्वारा संविधान सभा में अंतिम प्रारूप पेश करना - 4 नवंबर 1948 (संविधान का पहला वाचन)। अतः सही क्रम 2, 1, 4, 3 है।
प्र. 22: "ये प्रावधान भारत शासन अधिनियम, 1935 में उल्लिखित 'अनुदेश प्रपत्र' (Instruments of Instructions) के ही आधुनिक और विस्तृत रूप हैं। डॉ. बी.आर. अंबेडकर के शब्दों में, 'ये केवल वे निर्देश हैं जो विधायिका और कार्यपालिका को यह याद दिलाने के लिए हैं कि वे अपनी शक्तियों का प्रयोग करते समय किन लक्ष्यों का पालन करें।' हालांकि ये न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय (Enforceable) नहीं हैं, फिर भी देश के शासन में मूलभूत हैं।" उपर्युक्त परिच्छेद भारतीय संविधान के किस भाग या विशेषता का सटीक वर्णन करता है?
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: यह विवरण 'राज्य के नीति निदेशक तत्वों' (संविधान के भाग IV, अनुच्छेद 36-51) से संबंधित है। ब्रिटिश सरकार ने 1935 के अधिनियम के तहत गवर्नर-जनरल और गवर्नरों के लिए जो 'अनुदेश प्रपत्र' जारी किए थे, उन्हें ही स्वतंत्र भारत के संविधान में राज्य के नीति निदेशक तत्वों के रूप में शामिल किया गया। ये सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना के लिए सरकारों हेतु एक गैर-न्यायोचित दिशा-निर्देश हैं।
प्र. 23: भारतीय संविधान के विभिन्न विदेशी स्रोतों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सुमेलित नहीं है?
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: विकल्प D सुमेलित नहीं है। 'आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकारों का निलंबन' जर्मनी के 'वाइमर संविधान' (Weimar Constitution) से प्रेरित है, न कि सोवियत संघ (USSR) के संविधान से। सोवियत संघ के संविधान से 'मौलिक कर्तव्य' और प्रस्तावना में 'सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय' का आदर्श लिया गया है।
प्र. 24: संविधान सभा में कुल 15 महिला सदस्य शामिल थीं, जिन्होंने संविधान निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान दिया। निम्नलिखित में से महिला सदस्यों के उस सही समूह का चयन करें, जिन्होंने संविधान सभा में अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई थी?
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: विकल्प B में दी गई सभी महिलाएं (हंसा मेहता, दुर्गाबाई देशमुख, दक्षायणी वेलायुधन और अम्मू स्वामीनाथन) संविधान सभा की 15 महिला सदस्यों में शामिल थीं। दक्षायणी वेलायुधन संविधान सभा में एकमात्र दलित महिला सदस्य थीं। एनी बेसेंट, कमला नेहरू, कस्तूरबा गांधी और अरुणा आसफ अली संविधान सभा की सदस्य नहीं थीं, जिससे विकल्प A, C और D गलत हो जाते हैं।
प्र. 25: भारत शासन अधिनियम, 1935 द्वारा प्रस्तावित 'संघीय विधायिका' (Federal Legislature) की संरचना और शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों का मूल्यांकन कीजिए: I. संघीय विधायिका द्विसदनीय थी, जिसमें उच्च सदन 'राज्य परिषद' (Council of State) और निम्न सदन 'संघीय विधानसभा' (Federal Assembly) कहलाता था। II. राज्य परिषद एक स्थायी सदन (Permanent Body) था जिसे भंग नहीं किया जा सकता था, और इसके एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक तीन वर्ष में सेवानिवृत्त होते थे। III. अधिनियम के तहत बजट के एक बड़े हिस्से (जैसे रक्षा और विदेश मामले) पर संघीय विधायिका को मतदान करने का अधिकार नहीं दिया गया था, यह व्यय अ-मतदेय (Non-votable) था।
सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: दिए गए तीनों कथन पूर्णतः सत्य हैं। 1935 के अधिनियम ने केंद्र में द्विसदनीय विधायिका की स्थापना की। राज्य परिषद को स्थायी सदन बनाया गया जिसके 1/3 सदस्य हर 3 साल में रिटायर होते थे (वर्तमान राज्यसभा का प्रारूप इसी पर आधारित है)। रक्षा, विदेशी मामले और गवर्नर-जनरल के विशेषाधिकार से जुड़े व्यय को बजट में 'चार्ज्ड' (भारित) रखा गया था, जिस पर विधानसभा को मतदान का कोई अधिकार नहीं था।
प्र. 26: भारतीय संविधान की एक विशिष्ट विशेषता 'सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार' (Universal Adult Franchise) है। इसके वैधानिक स्वरूप के विषय में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: विकल्प C असत्य है। सर्वोच्च न्यायालय के कई निर्णयों (जैसे पीयूसीएल बनाम भारत संघ) के अनुसार, भारत में 'मतदान का अधिकार' एक 'मौलिक अधिकार' (Fundamental Right) नहीं है, बल्कि यह अनुच्छेद 326 के तहत एक 'संवैधानिक अधिकार' (Constitutional Right) और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत एक 'विधिक/वैधानिक अधिकार' (Statutory Right) है। इसे कानून द्वारा निर्धारित अयोग्यता (जैसे अपराध, भ्रष्टाचार) के आधार पर छीना जा सकता है।
प्र. 27: भारतीय संविधान की प्रमुख संस्थागत विशेषताओं और उनसे संबंधित अनुच्छेदों का मिलान कीजिए:
सूची-I (संस्था / निकाय) A. भारत का निर्वाचन आयोग B. वित्त आयोग C. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) D. भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG)
व्याख्या: स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन आयोग (Election Commission) का प्रावधान अनुच्छेद 324 में है। केंद्र और राज्यों के बीच राजस्व वितरण के लिए वित्त आयोग अनुच्छेद 280 के तहत गठित होता है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) का प्रावधान अनुच्छेद 315 में तथा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) का पद अनुच्छेद 148 में वर्णित है।
प्र. 28: नीचे दिए गए अभिकथन (A) और कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़ें: अभिकथन (A): 15 अगस्त 1947 को भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम लागू होने के पश्चात भारतीय संविधान सभा एक पूर्णतः संप्रभु (Sovereign) निकाय बन गई। कारण (R): उक्त अधिनियम ने संविधान सभा को यह अधिकार प्रदान कर दिया कि वह ब्रिटिश संसद द्वारा भारत के संबंध में बनाए गए किसी भी कानून को निरस्त कर सकती है या उसमें मनचाहा बदलाव कर सकती है।
सही विकल्प का चुनाव कीजिए:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं, और (R) सही व्याख्या है। 1946 में जब संविधान सभा बनी थी, तब यह कैबिनेट मिशन योजना के अधीन थी। लेकिन 1947 के भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम ने इसे पूरी तरह संप्रभु बना दिया। इस अधिनियम की धारा 8 ने स्पष्ट रूप से विधानसभा को यह शक्ति दी कि वह किसी भी ब्रिटिश कानून (स्वयं स्वतंत्रता अधिनियम सहित) को रद्द या संशोधित कर सकती है।
प्र. 29: "यह वैधानिक प्रपत्र भारत में 'प्रांतीय स्वायत्तता' के साथ-साथ 'रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया' (RBI) की स्थापना का मूल आधार बना। इसने न केवल एक 'संघीय लोक सेवा आयोग' की स्थापना की, बल्कि दो या अधिक प्रांतों के लिए 'संयुक्त लोक सेवा आयोग' का भी प्रावधान किया। इसी के प्रावधानों के तहत अंततः बर्मा (म्यांमार) को भारत से अलग कर दिया गया।" उपर्युक्त सभी ऐतिहासिक और वैधानिक तथ्य निम्नलिखित में से किससे संबंधित हैं?
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: यह विवरण भारत शासन अधिनियम, 1935 का है। इसी अधिनियम के प्रावधानों के तहत देश की मुद्रा और साख के नियंत्रण के लिए 1 अप्रैल 1935 को RBI की स्थापना हुई। इसके अलावा, इसने प्रांतीय और संयुक्त लोक सेवा आयोगों का मार्ग प्रशस्त किया तथा 1937 में बर्मा को भारत से अलग कर दिया गया।
प्र. 30: भारतीय संविधान 'संघात्मक और एकात्मक' व्यवस्था का एक जटिल मिश्रण प्रस्तुत करता है। 2026 के वैधानिक परिप्रेक्ष्य में, यदि भारत के राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 360 के तहत 'वित्तीय आपातकाल' (Financial Emergency) की घोषणा की जाती है, तो भारतीय संघीय ढांचे पर इसका क्या विश्लेषणात्मक प्रभाव पड़ेगा?
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: अनुच्छेद 360 के तहत वित्तीय आपातकाल लागू होने पर भारत का संघीय ढांचा पूरी तरह से एकात्मक वित्तीय नियंत्रण में बदल जाता है। केंद्र सरकार राज्यों को वित्तीय निर्देश दे सकती है और राज्य के अधीन सेवा करने वाले व्यक्तियों (हाई कोर्ट के जजों सहित) के वेतन और भत्तों में कटौती का आदेश दे सकती है। राज्य विधानसभाएं भंग नहीं होतीं (विकल्प A गलत है) और इसकी कोई अधिकतम समय-सीमा निर्धारित नहीं है, यह तब तक लागू रहता है जब तक इसे वापस न लिया जाए (विकल्प D गलत है)।
प्र. 31: भारतीय संविधान की प्रस्तावना में वर्णित 'न्याय' (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक) का आदर्श, जिसे संविधान के मूल ढांचे का अभिन्न अंग माना गया है, निम्नलिखित में से किस ऐतिहासिक घटना या दस्तावेज़ से प्रेरित है?
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: भारतीय संविधान की प्रस्तावना में शामिल 'सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय' का आदर्श 1917 की रूसी क्रांति (बोल्शेविक क्रांति) से प्रेरित है। इसके विपरीत, प्रस्तावना में उल्लिखित 'स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व' (Liberty, Equality, and Fraternity) के आदर्श फ्रांसीसी क्रांति से ग्रहण किए गए हैं।
प्र. 32: भारत शासन अधिनियम 1935 के तहत मताधिकार (Franchise) और निर्वाचन प्रणाली के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: I. इस अधिनियम ने संपत्ति, कर अदायगी या शिक्षा के आधार पर मताधिकार का विस्तार किया, जिससे ब्रिटिश भारत की लगभग 10% जनसंख्या को मतदान का अधिकार प्राप्त हुआ। II. इसने 'पूना पैक्ट' की भावना को दरकिनार करते हुए दलित जातियों (Depressed Classes) के लिए पृथक निर्वाचक मंडल (Separate Electorates) का सीधा प्रावधान किया। III. अधिनियम ने महिलाओं और मजदूर वर्ग (श्रमिकों) के लिए पृथक निर्वाचन की व्यवस्था कर सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व के सिद्धांत को और अधिक विस्तृत किया।
सही कूट का चयन करें:
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: कथन I और III सही हैं। 1935 के अधिनियम ने महिलाओं और श्रमिकों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र प्रदान करके सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व का विस्तार किया तथा लगभग 10% आबादी को सीमित मताधिकार दिया। कथन II गलत है क्योंकि दलित वर्गों के लिए 1932 के 'पूना पैक्ट' के अनुसार संयुक्त निर्वाचक मंडल के साथ सीटों के आरक्षण की व्यवस्था लागू की गई थी, न कि उनके लिए पूरी तरह से पृथक निर्वाचक मंडल बनाया गया था।
प्र. 33: संविधान सभा के सुचारू संचालन हेतु गठित विभिन्न समितियों और उनके अध्यक्षों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प असत्य है?
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: विकल्प C असत्य है। संविधान सभा की 'संचालन समिति' (Steering Committee) और 'प्रक्रिया नियम समिति' (Rules of Procedure Committee) दोनों के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे। के. एम. मुंशी संविधान सभा की 'कार्य संचालन समिति' (Order of Business Committee) के अध्यक्ष थे।
प्र. 34: भारतीय संविधान की आधारभूत विशेषताओं (विदेशी स्रोतों) और संबंधित देशों के संविधानों की सूची का मिलान कीजिए:
सूची-I (संवैधानिक प्रावधान) A. संसद् के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक B. विधि का शासन (Rule of Law) C. गणतंत्रात्मक व्यवस्था (Republic) D. संविधान संशोधन की प्रक्रिया
सूची-II (स्रोत देश) 1. ब्रिटिश संविधान 2. दक्षिण अफ़्रीकी संविधान 3. ऑस्ट्रेलियाई संविधान 4. फ्रांसीसी संविधान
नीचे दिए गए कूट का उपयोग कर सही उत्तर चुनें:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: संसद् के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (अनुच्छेद 108) का प्रावधान ऑस्ट्रेलिया से लिया गया है (A-3)। विधि का शासन, जो कि ए.वी. डायसी की अवधारणा है, ब्रिटिश संविधान से लिया गया है (B-1)। गणतंत्र (जिसमें राष्ट्राध्यक्ष निर्वाचित होता है) का विचार फ्रांस से प्रेरित है (C-4)। संविधान संशोधन की प्रक्रिया (अनुच्छेद 368) दक्षिण अफ्रीका के संविधान से ली गई है (D-2)।
प्र. 35: संविधान निर्माण से संबंधित निम्नलिखित ऐतिहासिक घटनाक्रमों को उनके घटित होने के सही कालक्रमानुसार (प्राचीनतम से नवीनतम) व्यवस्थित कीजिए: 1. राष्ट्रमंडल (Commonwealth) में भारत की सदस्यता का संविधान सभा द्वारा सत्यापन। 2. डॉ. बी.आर. अंबेडकर की अध्यक्षता में 7-सदस्यीय 'प्रारूप समिति' का गठन। 3. संविधान सभा की अंतिम बैठक का आयोजन और डॉ. राजेंद्र प्रसाद का राष्ट्रपति के रूप में चुनाव। 4. जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रस्तुत 'उद्देश्य प्रस्ताव' का संविधान सभा द्वारा सर्वसम्मति से पारित होना।
सही कूट का चयन करें:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: घटनाओं का सही कालक्रम: 1. उद्देश्य प्रस्ताव का पारित होना - 22 जनवरी 1947। 2. प्रारूप समिति का गठन - 29 अगस्त 1947। 3. राष्ट्रमंडल में भारत की सदस्यता का सत्यापन - मई 1949। 4. संविधान सभा की अंतिम बैठक और राष्ट्रपति का चुनाव - 24 जनवरी 1950। अतः सही क्रम 4, 2, 1, 3 है।
प्र. 36: नीचे दो वक्तव्य दिए गए हैं: एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है। अभिकथन (A): न्यायविदों द्वारा भारतीय संविधान को एक 'जीवंत दस्तावेज़' (Living Document) की संज्ञा दी जाती है। कारण (R): भारतीय संविधान समय, समाज और तकनीक की बदलती आवश्यकताओं के अनुसार अनुच्छेद 368 के तहत संशोधनों और निरंतर न्यायिक व्याख्याओं के माध्यम से स्वयं को अनुकूलित करने की क्षमता रखता है।
दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों पूर्णतः सत्य हैं तथा कारण (R), अभिकथन (A) की सटीक व्याख्या है। किसी भी संविधान को 'जीवंत' इसलिए कहा जाता है क्योंकि वह एक जड़ या मृत दस्तावेज़ नहीं होता; वह भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं और 2026 तक के आधुनिक परिदृश्यों (जैसे निजता का अधिकार, डिजिटल गवर्नेंस) के अनुसार संशोधनों और सर्वोच्च न्यायालय की रचनात्मक व्याख्याओं के माध्यम से विकसित होता रहता है।
प्र. 37: भारत शासन अधिनियम 1935 के प्रावधानों और उनके यथार्थ रूप में लागू होने या स्थापित होने के वर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सुमेलित नहीं है?
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: विकल्प D सुमेलित नहीं है। भारत में प्रथम 'केंद्रीय लोक सेवा आयोग' की स्थापना भारत शासन अधिनियम 1919 (और ली आयोग की सिफारिशों) के तहत 1926 में हुई थी। 1935 के अधिनियम ने इसके नाम को बदलकर 'संघीय लोक सेवा आयोग' (Federal Public Service Commission) किया और इसके साथ ही प्रांतीय व संयुक्त लोक सेवा आयोगों की स्थापना का प्रावधान किया।
प्र. 38: "वे संविधान सभा की अति-महत्वपूर्ण 'प्रारूप समिति' (Drafting Committee) के एकमात्र ऐसे सदस्य थे, जिनका मूल और राजनीतिक संबंध शुरू से ही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से था। इन्होंने ही संविधान की प्रस्तावना के संदर्भ में यह वकालत की थी कि हमारा लक्ष्य एक 'संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य' की स्थापना करना है।" उपर्युक्त ऐतिहासिक विवरण निम्नलिखित में से किस व्यक्तित्व की ओर इंगित करता है?
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: यह विवरण के.एम. मुंशी का है। यद्यपि प्रारूप समिति में कांग्रेस के टिकट पर चुने गए अन्य सदस्य भी थे, लेकिन के.एम. मुंशी एकमात्र ऐसे सदस्य थे जो मूल रूप से कांग्रेसी नेता थे (अन्य विशेषज्ञ या गैर-कांग्रेसी थे जिन्हें कांग्रेस के समर्थन से लाया गया था)। उन्होंने संविधान की 'संचालन समिति' में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और प्रस्तावना को "हमारे संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य की जन्मकुंडली" (Horoscope) कहा था।
प्र. 39: भारतीय संविधान में 'संघात्मक' (Federal) और 'एकात्मक' (Unitary) दोनों विशेषताएं समाहित हैं। निम्नलिखित में से केवल उन विशेषताओं के सही समूह का चयन करें, जो भारतीय संविधान की 'संघात्मक प्रकृति' (Federal Features) को प्रमाणित करती हैं:
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: विकल्प B में दी गई विशेषताएं (लिखित संविधान, शक्तियों का स्पष्ट विभाजन, संविधान की सर्वोच्चता, स्वतंत्र न्यायपालिका और द्विसदनीयता) विशुद्ध रूप से एक संघीय ढांचे (Federal Structure) के लक्षण हैं। जबकि विकल्प A, C और D में दी गई विशेषताएं (जैसे एकल नागरिकता, राज्यपाल की नियुक्ति, अखिल भारतीय सेवाएं, आपातकाल) भारतीय संविधान के 'एकात्मक झुकाव' (Unitary Bias) को दर्शाती हैं।
प्र. 40: भारत शासन अधिनियम 1935 के तहत जो 'अवशिष्ट शक्तियाँ' (Residuary Powers - वे विषय जो किसी भी सूची में शामिल नहीं थे) गवर्नर-जनरल (वायसराय) के विवेक पर छोड़ दी गई थीं, वे वर्तमान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 248 के अंतर्गत किसे सौंपी गई हैं?
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: 1935 के अधिनियम में अवशिष्ट शक्तियां वायसराय को दी गई थीं। परंतु वर्तमान भारतीय संविधान (कनाडा के मॉडल का अनुसरण करते हुए) अनुच्छेद 248 के तहत अवशिष्ट शक्तियां 'संसद' (Parliament) में निहित करता है। अर्थात्, ऐसे किसी भी विषय पर जो संघ सूची, राज्य सूची या समवर्ती सूची में उल्लिखित नहीं है (जैसे- साइबर कानून), कानून बनाने का अनन्य अधिकार केवल संसद के पास है।
प्र. 41: भारतीय संविधान के एक प्रमुख लक्षण 'पंथनिरपेक्षता' (Secularism) की वैधानिक प्रकृति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: I. भारतीय संविधान धर्म और राज्य (State) के बीच पश्चिमी मॉडल की भांति पूर्णतः अलगाव (Strict Separation) के सिद्धांत की वकालत करता है। II. भारतीय मॉडल 'सर्व धर्म समभाव' के सकारात्मक पहलू का प्रतिनिधित्व करता है, जहाँ राज्य सभी धर्मों को समान संरक्षण और सम्मान देता है। III. अनुच्छेद 25(2) के तहत, राज्य आवश्यकता पड़ने पर सामाजिक सुधार के उद्देश्य से (जैसे छुआछूत या सती प्रथा उन्मूलन) धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप कर सकता है।
सही कूट का चयन करें:
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: कथन II और III सही हैं। भारतीय पंथनिरपेक्षता एक 'सकारात्मक अवधारणा' है जो राज्य को सामाजिक सुधार हेतु धार्मिक कुरीतियों में हस्तक्षेप करने की अनुमति देती है। कथन I गलत है क्योंकि पश्चिमी (विशेषकर अमेरिकी या फ्रांसीसी) पंथनिरपेक्षता में धर्म और राज्य के बीच एक 'लौह दीवार' (Strict Separation) होती है, जहाँ राज्य धर्म के मामलों में बिल्कुल नहीं पड़ता, जबकि भारत में ऐसा पूर्ण अलगाव नहीं है; राज्य सभी धर्मों को समान रूप से सहयोग दे सकता है (जैसे हज या अमरनाथ यात्रा की व्यवस्था)।
प्र. 42: संविधान की 'प्रस्तावना' (Preamble) में प्रयुक्त विशिष्ट शब्दावली और उनके वैधानिक अर्थ के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: विकल्प C असत्य है। डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने संविधान सभा में स्पष्ट रूप से कहा था कि राजनीतिक लोकतंत्र तब तक स्थायी नहीं हो सकता जब तक कि उसके आधार में सामाजिक लोकतंत्र न हो। प्रस्तावना में प्रयुक्त 'लोकतांत्रिक' शब्द का अर्थ अत्यंत व्यापक है, जिसमें न केवल राजनीतिक लोकतंत्र बल्कि 'सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र' भी समाहित है।
प्र. 43: संविधान सभा की आलोचनाओं और उन आलोचनाओं को प्रस्तुत करने वाले ऐतिहासिक व्यक्तित्वों का सही मिलान कीजिए:
सूची-I (आलोचना/कथन) A. "संविधान सभा मूलतः हिन्दुओं का निकाय (Body of Hindus) है।" B. "संविधान सभा ने भारत के केवल एक बड़े समुदाय का प्रतिनिधित्व किया।" C. "संविधान सभा एक दलीय देश का एक दलीय निकाय थी; सभा ही कांग्रेस थी और कांग्रेस ही भारत था।" D. "भारतीय संविधान 'वकीलों का स्वर्ग' (Lawyer's Paradise) है।"
व्याख्या: लॉर्ड विस्काउंट साइमन ने संविधान सभा को 'हिन्दुओं का निकाय' कहा था (A-3)। विंस्टन चर्चिल ने टिप्पणी की थी कि यह केवल एक बड़े समुदाय (हिन्दुओं) का प्रतिनिधित्व करती है (B-1)। प्रसिद्ध ब्रिटिश न्यायविद ग्रानविले ऑस्टिन ने एक दलीय निकाय वाली टिप्पणी की थी (C-2)। सर आइवर जेनिंग्स ने संविधान की जटिल कानूनी भाषा और वकीलों के प्रभुत्व के कारण इसे 'वकीलों का स्वर्ग' कहा था (D-4)।
प्र. 44: भारत शासन अधिनियम 1935 के कड़े प्रावधानों, विशेषकर इसके 'संरक्षणों' (Safeguards) और 'विशेष उत्तरदायित्वों' की आलोचना करते हुए किस प्रमुख भारतीय नेता ने इसे "अनेक ब्रेकों वाली, परंतु बिना इंजन की मशीन" (A machine with strong brakes but no engine) की संज्ञा दी थी?
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 1935 के अधिनियम की कटु आलोचना करते हुए इसे "गुलामी का नया अधिकार पत्र" (New Charter of Slavery) और "अनेक ब्रेकों वाली, परंतु बिना इंजन की मशीन" कहा था। यह टिप्पणी इसलिए की गई थी क्योंकि प्रांतीय स्वायत्तता देने के बावजूद वास्तविक शक्तियां और वीटो पॉवर गवर्नर और गवर्नर-जनरल के पास सुरक्षित (Brakes) रखी गई थीं, जिससे चुनी हुई भारतीय सरकारों के पास कोई वास्तविक शक्ति (Engine) नहीं बची थी।
प्र. 45: नीचे दिए गए अभिकथन (A) और कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़ें: अभिकथन (A): संविधान के 'मूल ढांचे' (Basic Structure) का सिद्धांत भारतीय संविधान के किसी भी विशिष्ट अनुच्छेद में स्पष्ट रूप से परिभाषित या उल्लिखित नहीं है। कारण (R): यह सिद्धांत सर्वोच्च न्यायालय द्वारा केशवानंद भारती मामले (1973) में एक न्यायिक नवाचार (Judicial Innovation) के रूप में विकसित किया गया था ताकि अनुच्छेद 368 के तहत संसद की मनमानी संशोधन शक्ति पर अंकुश लगाया जा सके।
सही विकल्प का चुनाव कीजिए:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की पूर्णतः सही व्याख्या है। 'मूल ढांचा' शब्द संविधान की मूल प्रति में कहीं भी नहीं लिखा है। इसे 1973 में सर्वोच्च न्यायालय ने यह सुनिश्चित करने के लिए गढ़ा था कि संसद अनुच्छेद 368 की अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर संविधान के आधारभूत दर्शन (जैसे- लोकतंत्र, पंथनिरपेक्षता, न्यायिक समीक्षा) को नष्ट न कर दे। यह न्यायपालिका का एक ऐतिहासिक व्याख्यात्मक हथियार है।
प्र. 46: भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 के पारित होने के पश्चात् संविधान सभा की कार्यप्रणाली में आए मूलभूत परिवर्तनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: I. संविधान सभा एक संप्रभु निकाय बन गई और इसे भारत के संबंध में ब्रिटिश संसद द्वारा बनाए गए किसी भी कानून को निरस्त करने या बदलने का अधिकार प्राप्त हो गया। II. सभा को दोहरे कार्य सौंपे गए—एक स्वतंत्र भारत के लिए संविधान बनाना और दूसरा देश के लिए सामान्य कानून बनाना। III. जब यह निकाय 'संविधान सभा' के रूप में बैठक करता था, तब इसकी अध्यक्षता जी. वी. मावलंकर करते थे, और जब यह 'विधायिका' के रूप में मिलता था, तब डॉ. राजेंद्र प्रसाद अध्यक्षता करते थे।
नीचे दिए गए कूट का उपयोग कर सही उत्तर का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: कथन I और II पूर्णतः सत्य हैं। 1947 के अधिनियम ने संविधान सभा को पूर्ण संप्रभुता प्रदान की और इसे भारत की प्रथम संसद (विधायिका) के रूप में भी कार्य करने का अधिकार दिया। कथन III असत्य है क्योंकि अध्यक्षता का क्रम उल्टा दिया गया है। जब निकाय संविधान निर्माण के लिए (संविधान सभा के रूप में) मिलता था, तब इसकी अध्यक्षता डॉ. राजेंद्र प्रसाद करते थे, और जब यह सामान्य कानून बनाने के लिए (विधायिका के रूप में) मिलता था, तब इसकी अध्यक्षता जी. वी. मावलंकर करते थे।
प्र. 47: भारतीय संविधान की आधारभूत विशेषता 'संघवाद' (Federalism) के संदर्भ में, 2026 तक के अद्यतन संवैधानिक न्यायशास्त्र (Constitutional Jurisprudence) के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: विकल्प C असत्य है। अमेरिकी संविधान 'अविनाशी राज्यों का अविनाशी संघ' है, जहाँ राज्यों की सहमति के बिना केंद्र उनकी सीमाएं नहीं बदल सकता। इसके विपरीत, भारतीय संविधान 'विनाशी राज्यों का अविनाशी संघ' (Indestructible Union of Destructible States) है। अनुच्छेद 3 के तहत भारतीय संसद को यह अधिकार है कि वह साधारण बहुमत से किसी भी राज्य का नाम, क्षेत्र या सीमाएं बदल सकती है, अर्थात् भारतीय राज्यों का अस्तित्व केंद्र की विधायी इच्छा पर निर्भर करता है, लेकिन कोई राज्य संघ से अलग नहीं हो सकता।
प्र. 48: भारत शासन अधिनियम 1935 के प्रमुख प्रावधानों को उनके विशिष्ट प्रशासनिक प्रभावों के साथ सुमेलित कीजिए:
सूची-I (अधिनियम के प्रावधान) A. अखिल भारतीय संघ की योजना B. प्रांतों में द्वैध शासन (Dyarchy) का अंत C. केंद्र में द्वैध शासन की स्थापना D. अवशिष्ट शक्तियां (Residuary Powers)
सूची-II (प्रशासनिक प्रभाव / स्थिति) 1. गवर्नर-जनरल (वायसराय) के विवेक पर निर्भर 2. रक्षा, विदेश और जनजातीय मामलों का आरक्षित विषयों के रूप में वर्गीकरण 3. देशी रियासतों के शामिल न होने के कारण यह योजना कभी अस्तित्व में नहीं आई 4. 'प्रांतीय स्वायत्तता' (Provincial Autonomy) की शुरुआत
सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: अखिल भारतीय संघ की योजना (A) कभी लागू नहीं हो सकी क्योंकि रियासतों ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया (3)। प्रांतों में द्वैध शासन समाप्त कर (B) वहां 'प्रांतीय स्वायत्तता' लागू की गई (4)। केंद्र में द्वैध शासन (C) के तहत संघीय विषयों को 'आरक्षित' (रक्षा, विदेश) और 'हस्तांतरित' में बांटा गया (2)। अवशिष्ट शक्तियां (D) वायसराय को सौंपी गई थीं (1)।
प्र. 49: संविधान सभा की कार्यप्रणाली और संविधान निर्माण की प्रक्रिया से संबंधित निम्नलिखित ऐतिहासिक चरणों को उनके सही कालक्रमानुसार (शुरुआत से अंत की ओर) व्यवस्थित कीजिए: 1. संविधान सभा द्वारा 'राष्ट्रीय गान' (National Anthem) और 'राष्ट्रीय गीत' (National Song) को अपनाना। 2. संविधान सभा की प्रथम ऐतिहासिक बैठक का आयोजन, जिसमें मुस्लिम लीग ने भाग नहीं लिया। 3. जवाहरलाल नेहरू द्वारा 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution) का संविधान सभा में सर्वसम्मति से पारित किया जाना। 4. डॉ. बी. आर. अंबेडकर द्वारा संविधान सभा में 'द कॉन्स्टिट्यूशन एज सेटल्ड बाई द असेंबली बी पास्ड' नामक अंतिम प्रस्ताव पेश करना।
सही कूट का चयन करें:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: सही ऐतिहासिक क्रम इस प्रकार है: 1. संविधान सभा की प्रथम बैठक: 9 दिसंबर 1946 2. उद्देश्य प्रस्ताव का पारित होना: 22 जनवरी 1947 3. डॉ. अंबेडकर द्वारा अंतिम प्रस्ताव पेश करना: यह संविधान के तीसरे वाचन के अंत में (नवंबर 1949 में) पेश किया गया था, जिसे 26 नवंबर 1949 को पारित घोषित किया गया। 4. राष्ट्रीय गान और गीत अपनाना: 24 जनवरी 1950 (संविधान सभा की अंतिम बैठक के दिन)। अतः सही क्रम 2, 3, 4, 1 है।
प्र. 50: नीचे दो वक्तव्य दिए गए हैं: एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है। अभिकथन (A): भारतीय संविधान एक 'एकीकृत तथा स्वतंत्र' (Integrated and Independent) न्यायपालिका की स्थापना करता है। कारण (R): भारत में उच्च न्यायालयों (High Courts) के न्यायाधीशों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और उन्हें उनके पद से केवल संसद द्वारा महाभियोग जैसी कठोर प्रक्रिया के माध्यम से ही हटाया जा सकता है, राज्य विधानमंडलों द्वारा नहीं।
दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: अभिकथन (A) सत्य है, भारतीय न्यायपालिका एकीकृत (शीर्ष पर सुप्रीम कोर्ट, नीचे हाई कोर्ट) और कार्यपालिका/विधायिका से स्वतंत्र है। कारण (R) भी सत्य है और यह न्यायपालिका की 'स्वतंत्रता' और 'एकीकृत' प्रकृति दोनों की सही व्याख्या करता है। उच्च न्यायालय राज्य स्तर पर होते हैं, फिर भी उनके न्यायाधीशों की नियुक्ति और पदमुक्ति केंद्र (राष्ट्रपति/संसद) के पास है, जो एकीकृत ढांचे को पुष्ट करता है, तथा पदमुक्ति की कठोर प्रक्रिया उनकी स्वतंत्रता (Tenure security) सुनिश्चित करती है।
प्र. 51: भारतीय संविधान की 'उधार ली गई विशेषताओं' (Borrowed Features) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सुमेलित नहीं है?
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: विकल्प D सुमेलित नहीं है। भारतीय संविधान में 'संविधान संशोधन की प्रक्रिया' (अनुच्छेद 368 के तहत संसद का विशेष बहुमत और कुछ मामलों में आधे राज्यों का अनुसमर्थन) दक्षिण अफ्रीका (South Africa) के संविधान से प्रेरित है, न कि सोवियत संघ (USSR) के संविधान से। सोवियत संघ से मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duties) और न्याय का आदर्श लिया गया है।
प्र. 52: "संविधान के इस भाग को डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने भारतीय संविधान की 'अनूठी विशेषता' (Novel Feature) कहा था। प्रसिद्ध न्यायविद ग्रानविले ऑस्टिन (Granville Austin) ने इस भाग और मौलिक अधिकारों को संयुक्त रूप से 'संविधान की मूल आत्मा' (Conscience of the Constitution) वर्णित किया है। यह कल्याणकारी राज्य (Welfare State) की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करता है।" उपर्युक्त ऐतिहासिक और वैधानिक विवरण भारतीय संविधान के किस अंग से संबंधित है?
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: यह विवरण संविधान के भाग IV में वर्णित 'राज्य के नीति निदेशक तत्वों' (DPSP) से संबंधित है। डॉ. अंबेडकर ने इन्हें संविधान की 'अनूठी विशेषता' कहा था क्योंकि ये सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र स्थापित करने के निर्देश देते हैं। ग्रानविले ऑस्टिन ने माना था कि मौलिक अधिकार (भाग III) और DPSP (भाग IV) मिलकर संविधान के मूल दर्शन और उसकी आत्मा का निर्माण करते हैं।
प्र. 53: संविधान सभा की सबसे महत्वपूर्ण समिति 'प्रारूप समिति' (Drafting Committee) में 7 सदस्य थे। इनमें से कुछ सदस्य विशिष्ट विधि विशेषज्ञ थे जो मूल रूप से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य नहीं थे, लेकिन उनके वैधानिक अनुभव के कारण कांग्रेस के समर्थन से वे सभा में निर्वाचित हुए थे। निम्नलिखित में से ऐसे गैर-कांग्रेसी विधि विशेषज्ञों के सही समूह की पहचान कीजिए:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: विकल्प A सही है। डॉ. बी.आर. अंबेडकर (जिन्होंने पहले बंगाल से और फिर कांग्रेस के समर्थन से बॉम्बे प्रेसीडेंसी से चुनाव जीता), अल्लादि कृष्णास्वामी अय्यर (मद्रास के पूर्व महाधिवक्ता) और एन. गोपालस्वामी आयंगर (प्रशासनिक और कानूनी विशेषज्ञ) मूलतः कांग्रेसी नेता नहीं थे, बल्कि उन्हें उनके वैधानिक ज्ञान के कारण संविधान सभा और प्रारूप समिति में लाया गया था। (K.M. Munshi मूल रूप से कांग्रेसी थे, और D विकल्प वाले व्यक्ति विधानसभा के अधिकारी थे, सदस्य नहीं)।
प्र. 54: संविधान निर्माण की विशाल और जटिल प्रक्रिया के दौरान, भारत की संविधान सभा (Constituent Assembly) द्वारा अपने आधिकारिक प्रतीक (Seal / Emblem) के रूप में निम्नलिखित में से किस आकृति को अपनाया गया था?
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: संविधान सभा ने अपने आधिकारिक प्रतीक (Seal) के रूप में 'हाथी' (Elephant) को अपनाया था। यह मुहर संविधान सभा के आधिकारिक दस्तावेजों पर लगाई जाती थी। भारत के संविधान के विशाल आकार और प्रकृति को दर्शाने के लिए संभवतः हाथी का चयन किया गया था। (अशोक स्तंभ को बाद में 26 जनवरी 1950 को भारत के राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में अपनाया गया)।
प्र. 55: भारत शासन अधिनियम 1935 के अंतर्गत शक्तियों के विभाजन और विधायी नियंत्रण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: I. प्रांतीय विधानमंडलों द्वारा पारित किसी भी विधेयक पर प्रांतीय गवर्नर वीटो (Veto) का प्रयोग कर सकता था या उसे गवर्नर-जनरल के विचारार्थ आरक्षित कर सकता था। II. गवर्नर-जनरल (वायसराय) के पास यह शक्ति थी कि वह संघीय विधायिका या प्रांतीय विधायिका द्वारा पारित किसी भी विधेयक को ब्रिटिश सम्राट (Crown) की स्वीकृति के लिए आरक्षित कर सकता था। III. आपातकालीन स्थिति में गवर्नर-जनरल संघीय विधायिका की अनुमति के बिना अध्यादेश (Ordinances) जारी नहीं कर सकता था।
सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: कथन I और II पूर्णतः सत्य हैं। 1935 के अधिनियम ने विधायी नियंत्रण को काफी हद तक गवर्नर और गवर्नर-जनरल के हाथों में केंद्रित रखा था। कथन III असत्य है क्योंकि गवर्नर-जनरल को संकटकालीन परिस्थितियों में (और यहां तक कि सामान्य परिस्थितियों में भी अपने विशेष उत्तरदायित्वों के निर्वहन के लिए) संघीय विधायिका की सहमति के बिना अध्यादेश जारी करने का विशेषाधिकार प्राप्त था।
प्र. 56: संविधान सभा द्वारा संविधान निर्माण के विभिन्न कार्यों को सुव्यवस्थित करने के लिए गठित 'प्रमुख समितियों' (Major Committees) और उनके अध्यक्षों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म असत्य है?
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: विकल्प C असत्य है। मौलिक अधिकारों, अल्पसंख्यकों और जनजातीय तथा बहिष्कृत क्षेत्रों के लिए सलाहकार समिति (Advisory Committee on Fundamental Rights, Minorities and Tribal and Excluded Areas) के अध्यक्ष सरदार वल्लभभाई पटेल थे, न कि डॉ. बी.आर. अंबेडकर। इस बड़ी समिति के अंतर्गत पांच उप-समितियां भी कार्य कर रही थीं।
प्र. 57: संविधान सभा में महत्वपूर्ण प्रशासनिक और विधिक पदों पर कार्य करने वाले अधिकारियों और उनके द्वारा धारित पदों का मिलान कीजिए:
सूची-I (अधिकारी) A. एच. वी. आर. आयंगर (H. V. R. Iyengar) B. एस. एन. मुखर्जी (S. N. Mukherjee) C. सर बी. एन. राव (Sir B. N. Rau) D. वसंत कृष्ण वैद्य (Vasant Krishnan Vaidya)
सूची-II (पद / भूमिका) 1. संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार 2. संविधान के हिंदी संस्करण के सुलेखक (Calligrapher) 3. संविधान सभा के सचिव (Secretary) 4. संविधान सभा में मुख्य प्रारूपकार (Chief Draftsman)
सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: एच. वी. आर. आयंगर संविधान सभा के सचिव (Secretary) नियुक्त किए गए थे (A-3)। एस. एन. मुखर्जी संविधान सभा के मुख्य प्रारूपकार थे जिन्होंने जटिल प्रस्तावों को विधिक भाषा में ढाला (B-4)। सर बी. एन. राव संवैधानिक सलाहकार थे (C-1)। वसंत कृष्ण वैद्य ने मूल संविधान के हिंदी संस्करण का सुलेखन (Calligraphy) किया था (D-2), जबकि अंग्रेजी संस्करण का सुलेखन प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने किया था।
प्र. 58: नीचे दिए गए अभिकथन (A) और कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़ें: अभिकथन (A): भारत शासन अधिनियम 1935 ने प्रांतों में एक उत्तरदायी सरकार (Responsible Government) की स्थापना का प्रयास तो किया, परंतु इसने पूर्ण रूप से लोकतांत्रिक शासन स्थापित नहीं किया। कारण (R): इस अधिनियम ने गवर्नर-जनरल और प्रांतीय गवर्नरों को 'विशेष उत्तरदायित्व' (Special Responsibilities) और 'विवेकाधीन शक्तियां' (Discretionary Powers) प्रदान की थीं, जो निर्वाचित मंत्रियों की शक्तियों को सीमित और निरस्त कर सकती थीं।
सही विकल्प का चुनाव कीजिए:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं, तथा (R), (A) की सटीक व्याख्या है। यद्यपि 1935 के अधिनियम ने प्रांतों में द्वैध शासन समाप्त कर स्वायत्तता दी और मंत्रियों को उत्तरदायी बनाया, फिर भी इसे 'पूर्ण लोकतांत्रिक' नहीं कहा जा सकता। इसका कारण यही था कि ब्रिटिश सरकार ने गवर्नरों के पास वीटो पॉवर, अल्पसंख्यकों की रक्षा के नाम पर विशेष शक्तियां और धारा 93 के तहत सीधे शासन हाथ में लेने का अधिकार सुरक्षित (Safeguards) रखा था।
प्र. 59: विख्यात राजनीतिक विश्लेषक ग्रानविले ऑस्टिन (Granville Austin) ने अपनी पुस्तक 'द इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन: कॉर्नरस्टोन ऑफ ए नेशन' में संविधान सभा की कार्यप्रणाली के संदर्भ में 'समायोजन के सिद्धांत' (Principle of Accommodation) का विशेष उल्लेख किया है। 2026 के राजनीतिक विमर्श के दृष्टिकोण से, इस सिद्धांत का मुख्य अर्थ क्या था?
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: ग्रानविले ऑस्टिन के अनुसार, भारतीय संविधान सभा की सफलता का मुख्य कारण उसका निर्णय लेने का तरीका था, जिसे उन्होंने 'सहमति' (Consensus) और 'समायोजन का सिद्धांत' (Accommodation) कहा। समायोजन का अर्थ था दो चरम या विपरीत वैचारिक दृष्टिकोणों के बीच टकराव की स्थिति में एक व्यावहारिक मध्यमार्ग (Middle Path) खोजना, जिससे दोनों पक्षों को संतुष्ट किया जा सके। भाषा के मुद्दे पर 'मुंशी-आयंगर फॉर्मूला' और केंद्र-राज्य संबंधों में 'अर्ध-संघीय' ढांचा इसी सिद्धांत के सर्वोत्तम उदाहरण हैं।
प्र. 60: संविधान सभा में एक प्रमुख 'मूल अधिकार उप-समिति' (Fundamental Rights Sub-Committee) का गठन किया गया था, जिसने नागरिकों के अधिकारों को स्वरूप प्रदान करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। इस उप-समिति की अध्यक्षता निम्नलिखित में से किस प्रख्यात व्यक्तित्व ने की थी?
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: संविधान सभा की 'मौलिक अधिकारों, अल्पसंख्यकों एवं जनजातीय क्षेत्रों हेतु सलाहकार समिति' के अध्यक्ष सरदार वल्लभभाई पटेल थे। परंतु, इस बड़ी समिति के अंतर्गत गठित 'मूल अधिकार उप-समिति' (Fundamental Rights Sub-Committee) की अध्यक्षता जे. बी. कृपलानी ने की थी। (अल्पसंख्यक उप-समिति के अध्यक्ष एच. सी. मुखर्जी थे और पूर्वोत्तर सीमांत जनजातीय क्षेत्रों की उप-समिति के अध्यक्ष गोपीनाथ बोरदोलोई थे)।
प्र. 61: संविधान निर्माण के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में, निम्नलिखित घटनाक्रमों को उनके घटित होने के सही कालक्रमानुसार (सबसे पहले से नवीनतम की ओर) व्यवस्थित कीजिए: 1. 'कैबिनेट मिशन योजना' (Cabinet Mission Plan) का भारत में प्रकाशन। 2. लॉर्ड माउंटबेटन द्वारा भारत विभाजन की '3 जून योजना' (Mountbatten Plan) की घोषणा। 3. संविधान सभा द्वारा जवाहरलाल नेहरू के 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution) की सर्वसम्मति से स्वीकृति। 4. डॉ. बी.आर. अंबेडकर की अध्यक्षता में 7-सदस्यीय 'प्रारूप समिति' (Drafting Committee) का विधिवत गठन।
नीचे दिए गए कूट का उपयोग कर सही उत्तर का चयन करें:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: ऐतिहासिक घटनाओं का सही कालक्रम इस प्रकार है: 1. कैबिनेट मिशन योजना का प्रकाशन - 16 मई 1946। 2. उद्देश्य प्रस्ताव की स्वीकृति - 22 जनवरी 1947 (पेश 13 दिसंबर 1946 को हुआ था)। 3. माउंटबेटन (3 जून) योजना की घोषणा - 3 जून 1947। 4. प्रारूप समिति का गठन - 29 अगस्त 1947। अतः सही कालक्रम 1, 3, 2, 4 है।
प्र. 62: भारतीय संविधान की आधारभूत विशेषताओं (विदेशी स्रोतों) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सुमेलित नहीं है?
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: विकल्प D सुमेलित नहीं है। 'संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक' (अनुच्छेद 108) तथा 'व्यापार, वाणिज्य और समागम की स्वतंत्रता' का प्रावधान ऑस्ट्रेलिया के संविधान (Australian Constitution) से प्रेरित है, न कि दक्षिण अफ्रीका के संविधान से। दक्षिण अफ्रीका से 'संविधान संशोधन की प्रक्रिया' और 'राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव' लिया गया है।
प्र. 63: नीचे दो वक्तव्य दिए गए हैं: एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है। अभिकथन (A): भारत शासन अधिनियम 1935 ने ब्रिटिश भारतीय प्रांतों में 'द्वैध शासन' (Dyarchy) प्रणाली को पूर्णतः समाप्त कर दिया। कारण (R): अधिनियम ने प्रांतीय प्रशासन के विषयों को 'आरक्षित' (Reserved) और 'हस्तांतरित' (Transferred) श्रेणियों में विभाजित कर गवर्नरों की शक्तियों में अभूतपूर्व वृद्धि कर दी थी।
दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: अभिकथन (A) सत्य है क्योंकि 1935 के अधिनियम ने प्रांतों में द्वैध शासन को समाप्त कर 'प्रांतीय स्वायत्तता' लागू की थी। कारण (R) पूर्णतः गलत है क्योंकि विषयों को 'आरक्षित' और 'हस्तांतरित' श्रेणियों में विभाजित करने की व्यवस्था 1919 के अधिनियम द्वारा प्रांतों में लागू की गई थी (जिसे द्वैध शासन कहा जाता था)। 1935 के अधिनियम ने इस द्वैध शासन प्रणाली को प्रांतों से हटाकर 'केंद्र' (Federal level) पर लागू करने का प्रावधान किया था।
प्र. 64: संविधान सभा द्वारा 26 नवंबर 1949 को संविधान को अंगीकृत किए जाने के साथ ही इसके कुछ प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू हो गए थे। निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद (अथवा विषय) उस दिन प्रवर्तित (Enforce) नहीं हुआ था, बल्कि 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ?
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: 26 नवंबर 1949 को नागरिकता, चुनाव, तदर्थ संसद, अस्थायी और संक्रमणकालीन प्रावधानों से संबंधित कुल 16 अनुच्छेद (5, 6, 7, 8, 9, 60, 324, 366, 367, 379, 380, 388, 391, 392, 393 और 394) तत्काल प्रभाव से लागू हो गए थे। अनुच्छेद 330 (आरक्षण) इस सूची में शामिल नहीं था और यह शेष संविधान के साथ 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ था।
प्र. 65: भारतीय संविधान की आधारभूत विशेषताओं (Salient Features) और उसके संशोधनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों का विश्लेषण कीजिए: I. मूल संविधान (1949) में 'मूल कर्तव्यों' (Fundamental Duties) का कोई उल्लेख नहीं था; इन्हें स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों के आधार पर 42वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया। II. 2026 के अद्यतन संवैधानिक ढांचे में, संविधान 25 भागों (Parts) और 12 अनुसूचियों (Schedules) में विभाजित है। III. 'संपत्ति का अधिकार' (Right to Property), जिसे 44वें संशोधन द्वारा मूल अधिकारों की सूची से हटा दिया गया था, अब सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार संविधान के 'मूल ढांचे' (Basic Structure) का एक अप्रतिसंहरणीय हिस्सा है।
सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: कथन I और II सत्य हैं। मूल संविधान में केवल अधिकार थे, कर्तव्य 1976 में जोड़े गए। वर्तमान में संविधान में 25 भाग और 12 अनुसूचियां हैं (मूल रूप से 22 भाग और 8 अनुसूचियां थीं)। कथन III असत्य है क्योंकि यद्यपि संपत्ति का अधिकार भाग XII के अनुच्छेद 300A के तहत एक विधिक/संवैधानिक अधिकार है, लेकिन इसे न्यायपालिका द्वारा 'मूल ढांचे' (Basic Structure) का हिस्सा कभी घोषित नहीं किया गया है; संसद साधारण या विशेष बहुमत की प्रक्रिया से इसे संशोधित कर सकती है।
प्र. 66: भारतीय संविधान की अनुसूचियों और उनमें निहित विषय-वस्तु का सही मिलान कीजिए:
सूची-I (अनुसूची) A. तीसरी अनुसूची (Third Schedule) B. चौथी अनुसूची (Fourth Schedule) C. दसवीं अनुसूची (Tenth Schedule) D. बारहवीं अनुसूची (Twelfth Schedule)
सूची-II (विषय-वस्तु) 1. राज्य सभा में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए सीटों का आवंटन 2. संसद सदस्यों, केंद्रीय मंत्रियों और न्यायाधीशों आदि के शपथ या प्रतिज्ञान के प्रारूप 3. नगर पालिकाओं (Municipalities) की शक्तियां, प्राधिकार और उत्तरदायित्व 4. दल-बदल (Defection) के आधार पर संसद और राज्य विधानमंडल के सदस्यों की अयोग्यता
नीचे दिए गए कूट का उपयोग कर सही उत्तर चुनें:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: तीसरी अनुसूची में विभिन्न संवैधानिक पदाधिकारियों के शपथ/प्रतिज्ञान के प्रारूप हैं (A-2)। चौथी अनुसूची राज्यसभा में सीटों के आवंटन से संबंधित है (B-1)। दसवीं अनुसूची (52वें संशोधन 1985 द्वारा जोड़ी गई) दल-बदल विरोधी कानून का प्रावधान करती है (C-4)। बारहवीं अनुसूची (74वें संशोधन 1992 द्वारा जोड़ी गई) नगर पालिकाओं के 18 विषयों का वर्णन करती है (D-3)।
प्र. 67: संविधान सभा (Constituent Assembly) की कार्यप्रणाली और उससे जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: विकल्प B असत्य है। संविधान सभा ने 22 जुलाई 1947 को केवल 'राष्ट्रीय ध्वज' (National Flag) को अपनाया था। 'राष्ट्रीय गान' (जन गण मन) और 'राष्ट्रीय गीत' (वंदे मातरम) को संविधान सभा की अंतिम बैठक के दिन, अर्थात् 24 जनवरी 1950 को अपनाया गया था।
प्र. 68: "यह अवधारणा भारतीय संविधान में अमेरिकी मॉडल की 'दोहरी नीति' (Dual Polity) के विपरीत है। यद्यपि भारत का संविधान केंद्र और राज्यों की दोहरी राज्य-व्यवस्था स्थापित करता है, परंतु यह नागरिकों की निष्ठा को विभाजित नहीं करता। कोई भी राज्य अपने निवासियों को उनके जन्मस्थान के आधार पर किसी भी विशेष संवैधानिक विशेषाधिकार (जैसे मतदान) से वंचित या विभेदित नहीं कर सकता, सिवाय संसद द्वारा बनाए गए निवास-संबंधी विशिष्ट कानूनों के।" उपर्युक्त वैधानिक विवरण भारतीय संविधान की किस विशिष्ट विशेषता को परिभाषित करता है?
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: यह विवरण 'एकल नागरिकता' (Single Citizenship) का है। अमेरिका में प्रत्येक नागरिक देश का भी नागरिक होता है और उस विशिष्ट राज्य का भी जहाँ वह रहता है, जिससे उसे दोहरे अधिकार मिलते हैं। इसके विपरीत, भारत में संघीय ढांचा होने के बावजूद नागरिकता केवल 'भारतीय' होती है (अनुच्छेद 9 के संदर्भ में), और पूरे देश में नागरिकों को समान राजनीतिक और नागरिक अधिकार प्राप्त हैं, जो राष्ट्र की एकता को बढ़ावा देता है।
प्र. 69: भारतीय संविधान को न्यायविदों द्वारा 'अर्ध-संघात्मक' (Quasi-Federal) कहा जाता है क्योंकि इसमें संघात्मक लक्षणों के साथ-साथ मजबूत 'एकात्मक या गैर-संघात्मक' (Unitary or Non-Federal) लक्षण भी विद्यमान हैं। निम्नलिखित में से केवल 'एकात्मक/गैर-संघात्मक विशेषताओं' वाले सही समूह का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: विकल्प C में उल्लिखित सभी विशेषताएं (एकल नागरिकता, अनुच्छेद 352/356/360 के तहत आपातकाल, IAS/IPS जैसी अखिल भारतीय सेवाएं, और केंद्र द्वारा राज्यपाल की नियुक्ति) स्पष्ट रूप से केंद्र को राज्यों की तुलना में अधिक शक्तिशाली बनाती हैं, अतः ये संविधान के 'एकात्मक' या 'गैर-संघात्मक' लक्षण हैं। विकल्प A और B विशुद्ध संघात्मक लक्षण हैं। भारत में राज्यसभा में राज्यों का समान प्रतिनिधित्व नहीं है (जनसंख्या के आधार पर है), जिससे D भी गलत है।
प्र. 70: 2026 के अद्यतन संवैधानिक और न्यायिक परिप्रेक्ष्य (बेरुबारी यूनियन वाद और 100वें संविधान संशोधन के आलोक में) में, यदि भारत सरकार किसी अंतरराष्ट्रीय समझौते के तहत भारतीय भू-भाग का कोई हिस्सा किसी विदेशी राष्ट्र को सौंपना (Cede) चाहती है, तो संसद को अनिवार्य रूप से किस वैधानिक प्रक्रिया का पालन करना होगा?
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: बेरुबारी यूनियन मामले (1960) में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के निर्माण या सीमा परिवर्तन की संसद की शक्ति में भारतीय क्षेत्र को किसी विदेशी राज्य को सौंपने (Cession of territory) की शक्ति शामिल नहीं है। इसके लिए संसद को अनुच्छेद 368 के तहत संविधान में संशोधन करना ही होगा। इसी प्रक्रिया का पालन करते हुए भारत-बांग्लादेश भूमि सीमा समझौते के लिए 100वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2015 पारित किया गया था।
प्र. 71: ब्रिटिश भारत में संवैधानिक विकास को दिशा देने वाले निम्नलिखित ऐतिहासिक अधिनियमों को उनके लागू होने के कालक्रमानुसार (प्राचीनतम से नवीनतम) व्यवस्थित कीजिए: 1. वह अधिनियम जिसने 'सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व' (Communal Representation) के सिद्धांत को वैधानिक मान्यता दी। 2. वह अधिनियम जिसने प्रांतों में 'द्वैध शासन' (Dyarchy) प्रणाली की शुरुआत की। 3. पिट्स इंडिया एक्ट (Pitt's India Act), जिसने कंपनी के राजनीतिक और वाणिज्यिक कार्यों को अलग किया। 4. चार्टर अधिनियम, जिसने ईस्ट इंडिया कंपनी का व्यापारिक एकाधिकार (Trade Monopoly) पूर्णतः समाप्त कर दिया।
सही कूट का चयन करें:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: अधिनियमों का सही कालक्रम इस प्रकार है: 1. पिट्स इंडिया एक्ट - 1784 (कथन 3) 2. चार्टर अधिनियम जिसने व्यापारिक एकाधिकार पूर्णतः समाप्त किया (चीन और चाय सहित) - 1833 (कथन 4) 3. सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व वाला अधिनियम (मार्ले-मिंटो सुधार) - 1909 (कथन 1) 4. प्रांतों में द्वैध शासन वाला अधिनियम (मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार) - 1919 (कथन 2) अतः सही क्रम 3, 4, 1, 2 है।
प्र. 72: भारतीय संविधान के विभिन्न 'भागों' (Parts) और उनके अंतर्गत आने वाले विषयों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सुमेलित नहीं है?
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: विकल्प C सुमेलित नहीं है। भारतीय संविधान का भाग IX 'पंचायतों' (Panchayats) से संबंधित है (73वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया)। 'सहकारी समितियां' (Co-operative Societies) भाग IX-B (97वें संशोधन अधिनियम 2011 द्वारा स्थापित) के अंतर्गत आती हैं, जबकि भाग IX-A में नगर पालिकाएं हैं। शेष सभी युग्म सही सुमेलित हैं।
प्र. 73: नीचे दिए गए अभिकथन (A) और कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़ें: अभिकथन (A): भारतीय संविधान के भाग III में उल्लिखित 'मूल अधिकार' (Fundamental Rights) पूर्णतः निरपेक्ष (Absolute) नहीं हैं, बल्कि ये योग्य (Qualified) हैं। कारण (R): भारत का सर्वोच्च न्यायालय स्वयं अपनी पहल (Suo Motu) पर लोक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर इन अधिकारों पर स्थायी 'युक्तियुक्त निर्बंधन' (Reasonable Restrictions) लागू करता है।
सही विकल्प का चुनाव कीजिए:
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: अभिकथन (A) सत्य है क्योंकि भारत में मूल अधिकार असीमित नहीं हैं; उन पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। परंतु कारण (R) पूर्णतः गलत है। मूल अधिकारों पर 'युक्तियुक्त निर्बंधन' (Reasonable Restrictions) लगाने का अधिकार 'राज्य' (मुख्यतः संसद या विधायिका) को है, न कि न्यायपालिका को। न्यायपालिका का कार्य केवल यह समीक्षा करना है कि राज्य द्वारा लगाए गए निर्बंधन 'युक्तियुक्त' (तार्किक और संवैधानिक) हैं या नहीं।
प्र. 74: भारत शासन अधिनियम 1935 के प्रावधानों और उनके ऐतिहासिक परिणामों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: I. इसने 1858 के अधिनियम द्वारा स्थापित 'भारत परिषद' (Council of India) को समाप्त कर दिया और भारत सचिव (Secretary of State) को सलाहकारों की एक टीम प्रदान की। II. इसने महिलाओं, दलित वर्गों (Depressed Classes) और श्रमिकों के लिए पृथक निर्वाचन की व्यवस्था करके सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व के सिद्धांत को और अधिक विस्तृत किया। III. इस अधिनियम के अंतर्गत वर्ष 1937 में हुए प्रांतीय चुनावों में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की और 11 में से अधिकांश प्रांतों में अपनी सरकारें बनाईं।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: दिए गए तीनों कथन ऐतिहासिक और वैधानिक रूप से पूर्णतः सत्य हैं। 1935 के अधिनियम ने 1858 से चली आ रही 'भारत परिषद' को भंग कर दिया। सांप्रदायिक अवार्ड और पूना पैक्ट के पश्चात, इस अधिनियम ने महिलाओं और श्रमिकों को भी पृथक निर्वाचक मंडल में शामिल किया। इसके परिणामस्वरूप हुए 1937 के चुनावों में कांग्रेस ने 11 में से 8 प्रांतों (मद्रास, बंबई, मध्य प्रांत, उड़ीसा, बिहार, संयुक्त प्रांत, बाद में पश्चिमोत्तर सीमा प्रांत और असम) में सरकारें बनाईं।
प्र. 75: "भारतीय संविधान एक ऐसा विस्तृत और बृहद दस्तावेज़ है जिसे सर आइवर जेनिंग्स सहित कई न्यायविदों ने 'हाथी के आकार' (Elephantine Size) का कहा है।" वर्ष 2026 के अद्यतन वैधानिक विश्लेषण के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन-सा कारक संविधान के इस अत्यधिक विशाल आकार के लिए उत्तरदायी 'मूल कारणों' में सम्मिलित नहीं है?
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: विकल्प C असत्य है। संविधान के अत्यधिक विस्तृत होने का कारण अर्थशास्त्रियों का प्रभुत्व नहीं था, बल्कि संविधान सभा में 'कानूनी दिग्गजों' (Legal Luminaries / Lawyers) का प्रभुत्व था, जिन्होंने हर संभावित वैधानिक विवाद से बचने के लिए प्रावधानों को अत्यधिक जटिल और विस्तृत विधिक भाषा में लिखा। अन्य सभी विकल्प (1935 के अधिनियम का प्रभाव, भौगोलिक-सामाजिक विविधता, और केंद्र-राज्यों के लिए एक ही संविधान) इसके विशाल आकार के सत्य और प्रामाणिक कारण हैं।